LAW'S VERDICT

ड्राइवर के पास था लाइसेंस तो बीमा कंपनी को ही देना पड़ेगा मुआवजा



 डंपर हादसा केस में हाईकोर्ट की ग्वालियर  बेंच का फैसला:  वाहन मालिक मुआवजे से हुआ बरी

ग्वालियर। मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति से जुड़े एक पुराने लेकिन अहम मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। जस्टिस हिरदेश की सिंगल बेंच ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में बीमा कंपनी ही मुआवजा भुगतान के लिए जिम्मेदार होगी।  ऐसा इसलिए क्योंकि डम्पर चला रहे ड्राइवर के पास वैध  ड्राइविंग लाइसेंस था।  बेंच ने वाहन मालिक को मुआवजे के भुगतान से पूरी तरह मुक्त कर दिया है। यह निर्णय भविष्य के मोटर दुर्घटना मामलों में एक मजबूत नजीर के रूप में देखा जा रहा है। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि यदि वाहन मालिक ने चालक नियुक्त करते समय उचित सावधानी बरती है, तो बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। यह फैसला  Motor Accident Claims Tribunal ग्वालियर द्वारा पारित अवॉर्ड को चुनौती देने वाली दो अलग-अलग अपीलों पर सुनाया गया। बीमा दावों, वाहन मालिकों और दुर्घटना पीड़ितों—तीनों के लिए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पूरा मामला क्या है

यह मामला 8–9 अगस्त 2004 की दरम्यानी रात का है। एक डंपर के अनियंत्रित होकर पलट जाने से उसमें सवार कमल किशोर बघेल गंभीर रूप से घायल हो गए थे। आरोप था कि चालक ने वाहन को तेज और लापरवाही से चलाया, जिसके चलते हादसा हुआ। घायल को पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के समक्ष क्षतिपूर्ति याचिका दायर की गई। सुनवाई के बाद ग्वालियर की क्लेम ट्रिब्यूनल ने 20 अप्रैल 2009 को दावेदार के पक्ष में ₹4,90,000/- मुआवजा निर्धारित किया था।

दो अपीलें, एक निर्णायक फैसला

हादसे में घायल कमल किशोर बघेल ने मुआवजा राशि को कम बताते हुए बढ़ोतरी की मांग की। वहीं, वाहन मालिक पंकज शर्मा ने अपील दायर कर कहा कि चालक के ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर बीमा कंपनी ने उसे गलत तरीके से भुगतान के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

ड्राइविंग लाइसेंस पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

कोर्ट के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि वाहन मालिक पंकज शर्मा ने ड्राइवर को नियुक्त करते समय उसका ड्राइविंग लाइसेंस देखा था। इतना ही नहीं, वह लाइसेंस आरटीओ ग्वालियर से चार बार renew  भी हुआ था। बीमा कंपनी यह साबित करने में नाकाम रही कि वाहन मालिक ने जानबूझकर बीमा शर्तों का उल्लंघन किया है।

हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि सिर्फ लाइसेंस में तकनीकी खामी के आधार पर और बिना “जानबूझकर लापरवाही” सिद्ध किए बीमा कंपनी द्वारा वाहन मालिक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।  इन टिप्पणियों के साथ बेंच ने बीमा कंपनी को  भुगतान के आदेश दिए हैं।

क्यों बेहद अहम है यह फैसला

यह निर्णय भविष्य के मोटर दुर्घटना मामलों में एक मजबूत नजीर के रूप में देखा जा रहा है। कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि यदि वाहन मालिक ने चालक नियुक्त करते समय उचित सावधानी बरती है, तो बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती।

MISC. APPEAL No. 999 of 2009

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